अंक 01 . जून 2026खुले पैसे. पैनी निगाहें.

दुनिया . Souk Weekly

डायस्पोरा अलग तरीक़े से बैंकिंग कर रहा है. बैंकों ने अब तक ठीक से नहीं देखा.

क्यों दो ख़ास देशों के बीच रेमिटेंस कॉरिडोर चुपचाप बायपास हो रहा है, और मौजूदा बैंक इसके बारे में क्या कर रहे हैं — जो ज़्यादातर कुछ नहीं है.

लेखक Lena Holloway2 मिनट

अद्यतन

The Diaspora Is Banking Differently. The Banks Have Not Quite Noticed.. Souk Weekly world. Photograph keyed to bank.

रेमिटेंस कॉरिडोर बैंक के स्ट्रैटजी डेक्स में अब भी मौजूद है. असली यूज़र व्यवहार में, वह आंशिक रूप से बदल चुका है.

बात एक ख़लीजी देश और एक दक्षिण एशियाई देश के बीच के कॉरिडोर की है. इसका औपचारिक सालाना वॉल्यूम बीस अरब डॉलर से ज़्यादा है. बैंकों के बाहर का वॉल्यूम, ज़मीनी अनुमान के अनुसार, अब उस आँकड़े के आधे से ज़्यादा हो चुका है.

कहानी सीधी है: एक नॉन-बैंक ऐप, सत्तर प्रतिशत कम कमीशन, पाँच मिनट में डिलीवरी. ऐप विज्ञापन नहीं करता, बिलबोर्ड नहीं लगाता, प्रेस से बात नहीं करता. वह मुँह-दर-मुँह बढ़ता है — साइट पर मज़दूरों के बीच, शाम के बाद कैफ़े में.

बैंकों को पता है. मैनेजमेंट रिपोर्ट्स में इसका ज़िक्र है. पर असली प्रतिक्रिया स्ट्रक्चर के कारण धीमी है — एक बैंकिंग प्रोडक्ट बनाने में अठारह महीने लगते हैं, नॉन-बैंक ऐप हर महीने नया फ़ीचर लॉन्च करता है. दौड़ का नतीजा तय है. सवाल बस यह है कि सब कब मानेंगे.

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