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गुल्फ और दक्षिण एशिया की व्यापार सहयोग: अर्थनीतिक परिवर्तनों के मध्य नए व्यापार समझौते उभर रहे हैं
इस लेख में, गुल्फ कॉपरेशन कOUNCIL (GCC) देशों और दक्षिणी एशियाई राज्यों के व्यापार और आर्थिक नीतियों में हुई संवर्धनों पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।

समीप पश्चिमी अरब महासागर (GCC) देशों ने सदरहता के साथ दक्षिणी एशियाई राज्यों के साथ आर्थिक बंधनों को मजबूत करने और दलाली सम्बन्धों को तेहसुरान करने के लिए प्रवृत्त हो गए हैं। यहाँ टीका, दोनों क्षेत्रों के संशोधकों ने मुद्दों के परिचय पर उच्च-स्तरीय मीटिंगों का आयोजन किया है, जो एक संश्लेषणात्मक आर्थिक नीतियों के प्रति पुष्टि व्यक्त करता है और दीर्घकाळिक समस्याओं को प्रबन्धित करने में।
नवीन व्यापार समझौते
इन महत्वपूर्ण उपलक़ों में से एक है, सऊदी अरब और भारत के बीच प्रस्तावित नि:शुल्क व्यापार समझौता, जो व्यापक उपहारों पर टाफ़ेर को कम करने का मकसद है। इस समझौते से दोनों देशों की उत्पादनों के लिए बाजार प्रवेश की अधिकता मिल सकती है, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल घटक, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेत्रोकेमिकल्स की क्षेत्रों में।
इसी प्रकार, बहरायन ने भारत के साथ एक व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता जेम चलाने की मैदानी घोषणा की है। इस प्रारंभिक दृष्टि से, पाकिस्तान के बिजनेस्मन को GCC के वित्तीय सेवा क्षेत्र में अवसरों की पहचान करने के लिए आकांक्षा रखनी है।
चुनौतियाँ और विधेयक सुधार
इन प्रसन्नकारी उपलक़ों के बाद, दोनों ओर कई चुनौतियाँ रही हैं। मुख्य चुनौतियों में से एक है परस्पर विभिन्न विदेशी की प्रवेशपात्र का विधेयक फ़रमाइट, जो कंपनियों के लिए कई सुरक्षा मौजूद हैं जो देशों की प्रति-भागी सरकारों के अधिनस्थ कर वहन करने के लिए चल रहा है।
इस मुद्दे को प्रबन्धित करने के लिए, GCC देशों ने अपनी FDI विधेयकों की समीक्षा कर रहे हैं और उन्हें अधिक बाजार-सुविधाप्रद बनाने के लिए सुधार जारी कर रखे हैं। उदाहरणत: अमेंटा, UAE में इंडिस्ट्रियल लॉव को पुनः संशोधित किया गया है जो 100% विदेशी साकर्णता को अधिनक्रमित करता है, इस मुद्दे पर एक बहुत खुले और लचीले विधेयक संशोधन चलाने के अभिप्राय का संकेत मिलता है।
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